समर्पण: निःस्वार्थ प्रेम की पराकाष्ठा
- Mokshsundar Maharajsaheb

- Jun 5
- 1 min read

🙏 जय दादा आदिनाथ 🙏
🌹जय गुरुदेव 🌹
❣️🫰💞👑💝✨
🤍🌟 यकीन 🌟🤍
*" तू रख यकीन बस अपने इरादों पर तेरी हार तेरे हौसलों से तो बड़ी नहीं होगी !?????
🤔😚😃💫🌹❣️❣️
*"पहले रिश्तों की ज़रूरत थी हमें ,*🤝🤝🤝
*आज रिश्ते हैं ज़रूरत के लिए!!!*🤝🤝🤝👩❤️👨👩❤️👨👩❤️👨
*जब हो थोड़ी फुर्सत, मन की बात कह लेना*😍😍
*बहुत खामोश रिश्ते तो कभी जिंदा नहीं रहते.*😔😔
नफरत तो बहुत की है हमने उसके ऊपर ☹️
मगर जब खुद की कहीं गलतियां को समझना था
वह पर तो हमें उसको ही गलत साबित करने बैठे थे।।
🫵🫵🫵
यकीन से बोलता हूं कि जो भी बिना पहचान वाला.. यदि आप के जीवन की नजदीक आके..❣️🤍❣️ आप को वो थोड़ा भी खुद से ज्यादा समझकर मानता है तो समझना कि वो खुद से ज्यादा आप को प्यार ❣️करता है सिर्फ जता नहीं पाता है।।।।
कद्र करो उस इंसान की... जहां दूर दूर तक कोई पहचान नहीं थी...😚🫶 फिर भी आज आप के लिए वो खुद को मिटा रहा है।।।
छोड़ दो तुम अब तुम्हारा सब कुछ.. देदो जिंदगी के दौर उनके हाथ में..🫳🫴🤝
चाहे अब वो जो भी करे वो तुम तुम्हारी जिंदगी में उसे स्वीकार कर लो...🫶👩❤️👨💍
यह मत सोचो की वो क्या है? ओर मुझे क्या करेगा?? छोड़ दो यह सोचना और देदो जिंदगी उनके हाथ में।।🤝🫶❣️💍👩❤️👨🤍
🫴🫳
🤍👉 सदा नो साथी 👈🤍




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